श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.6.79 
लौगाक्षिर्माङ्गलि: कुल्य: कुशीद: कुक्षिरेव च ।
पौष्यञ्जिशिष्या जगृहु: संहितास्ते शतं शतम् ॥ ७९ ॥
 
 
अनुवाद
लौगाक्षि, मांगलि, कुल्य, कुशीद और कुक्षि सहित पौष्यञ्जि के पाँच अन्य शिष्यों को एक-एक सौ संहिताएँ मिलीं।
 
Pauṣyānji's five other disciples, Laugaṇḍi, Māngāli, Kulya, Kushīda and Kukṣī, each received one hundred samhitas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)