Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.6.62: एक बार वैशम्पायन जी के शिष्य याज्ञवल्क्य ने उनसे कहा, "हे गुरुदेव, आप के निर्बल शिष्यों के कमजोर प्रयासों से कितना लाभ प्राप्त किया जा सकता है? मैं स्वयं अद्वितीय तपस्या करूँगा।" | bhagavat अध्याय 12.6: महाराज परीक्षित का निधन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक बार वैशम्पायन जी के शिष्य याज्ञवल्क्य ने उनसे कहा, "हे गुरुदेव, आप के निर्बल शिष्यों के कमजोर प्रयासों से कितना लाभ प्राप्त किया जा सकता है? मैं स्वयं अद्वितीय तपस्या करूँगा।"
Once Yagnavalkya, a disciple of Vaishmpayana, said, "O Lord, how much benefit can be derived from the feeble efforts of these feeble disciples of yours? I myself will perform some unique penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥