Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.6.48-49: हे ब्राह्मण, वैवस्वत मनु के वर्तमान युग में, ब्रह्मा, शिव इत्यादि ब्रह्माण्ड के नायकों ने समस्त जगतों के रक्षक भगवान् से धर्म के सिद्धान्तों की रक्षा करने के लिए प्रार्थना की। हे परम भाग्यशाली शौनक, तब अपने स्वांश के अंश का दिव्य स्फुलिंग प्रदर्शित करते हुए पराशर के पुत्र के रूप में सत्यवती के गर्भ से भगवान् प्रकट हुए। इस रूप में, जिसे कृष्ण द्वैपायन व्यास कहते हैं, उन्होंने एक वेद को चार भागों में बाँट दिया। | bhagavat अध्याय 12.6: महाराज परीक्षित का निधन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण, वैवस्वत मनु के वर्तमान युग में, ब्रह्मा, शिव इत्यादि ब्रह्माण्ड के नायकों ने समस्त जगतों के रक्षक भगवान् से धर्म के सिद्धान्तों की रक्षा करने के लिए प्रार्थना की। हे परम भाग्यशाली शौनक, तब अपने स्वांश के अंश का दिव्य स्फुलिंग प्रदर्शित करते हुए पराशर के पुत्र के रूप में सत्यवती के गर्भ से भगवान् प्रकट हुए। इस रूप में, जिसे कृष्ण द्वैपायन व्यास कहते हैं, उन्होंने एक वेद को चार भागों में बाँट दिया।
O Brahmin, in the present age of Vaivasvata Manu, the heroes of the universe, Brahma, Shiva, etc., prayed to the Lord, the protector of all worlds, to protect the principles of Dharma. O most fortunate Saunaka, then, manifesting a divine spark of His own portion, the Lord appeared from Satyavati's womb as the son of Parashara. In this form, which Krishna calls Dwaipayana Vyasa, He divided the one Veda into four parts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥