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bhagavat 12.6.44: चारों वेदों के पुरोहितों द्वारा सम्पन्न विभिन्न तरह के कार्यों के अनुसार वैदिक यज्ञ विधि का प्रसार करने के लिए सर्वशक्तिमान ब्रह्मा ने ध्वनियों के समूह का उपयोग अपने चार मुखों से चारों वेदों, पवित्र ॐकार और सात व्याहृतियों के साथ की।   |   bhagavat अध्याय 12.6: महाराज परीक्षित का निधन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.6.44 
तेनासौ चतुरो वेदांश्चतुर्भिर्वदनैर्विभु: ।
सव्याहृतिकान् सोंकारांश्चातुर्होत्रविवक्षया ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
चारों वेदों के पुरोहितों द्वारा सम्पन्न विभिन्न तरह के कार्यों के अनुसार वैदिक यज्ञ विधि का प्रसार करने के लिए सर्वशक्तिमान ब्रह्मा ने ध्वनियों के समूह का उपयोग अपने चार मुखों से चारों वेदों, पवित्र ॐकार और सात व्याहृतियों के साथ की।
 
The almighty Brahma used this set of sounds to produce from his four mouths the four Vedas which manifested along with the sacred Omkara and the seven Vyahrtis. His intention was to extend the Vedic sacrificial ritual to the various functions performed by the priests of each of the four Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)