श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.6.43 
ततोऽक्षरसमाम्नायमसृजद् भगवानज: ।
अन्तस्थोष्मस्वरस्पर्शह्रस्वदीर्घादिलक्षणम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
ॐकार से, भगवान ब्रह्मा ने अक्षरों की सभी ध्वनियों का सृजन किया - स्वर, व्यंजन, अर्ध-स्वर, उष्म और स्पर्श आदि, जो कि ह्रस्व और दीर्घ माप जैसे गुणों से विभेदित हैं।
 
Brahma produced from Omkar all the sounds of the alphabet - vowels, consonants, semivowels, heat, touch etc. which are differentiated by qualities like short and long measure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)