श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.6.35 
नमो भगवते तस्मै कृष्णायाकुण्ठमेधसे ।
यत्पादाम्बुरुहध्यानात् संहितामध्यगामिमाम् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
मैं अजेय भगवान श्री कृष्ण को प्रणाम करता हूं। उनके चरण कमलों पर ध्यान लगाने से ही मैं इस महान साहित्य का अध्ययन कर सका और उसकी सराहना कर सका।
 
I offer my obeisances unto the unobstructed Lord Krishna. It is only by meditating upon His lotus feet that I have been able to study and appreciate this great book.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)