Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.5.4: सपने में व्यक्ति अपने सिर को कटते देख सकता है और वह समझ सकता है कि उसका आत्मा सपने के अनुभव से अलग खड़ा है। उसी तरह जागते समय व्यक्ति यह देख सकता है कि उसका शरीर पाँच भौतिक तत्वों का फल है। इसलिए यह माना जाता है कि वास्तविक आत्मा उस शरीर से पृथक है जिसे वह देखता है और वह अजन्मा और अमर है। | bhagavat अध्याय 12.5: महाराज परीक्षित को शुकदेव गोस्वामी का अन्तिम उपदेश । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सपने में व्यक्ति अपने सिर को कटते देख सकता है और वह समझ सकता है कि उसका आत्मा सपने के अनुभव से अलग खड़ा है। उसी तरह जागते समय व्यक्ति यह देख सकता है कि उसका शरीर पाँच भौतिक तत्वों का फल है। इसलिए यह माना जाता है कि वास्तविक आत्मा उस शरीर से पृथक है जिसे वह देखता है और वह अजन्मा और अमर है।
In a dream a man may see his own head being cut off and he may understand that his soul stands apart from the dream experience. Similarly, when awake a man may see that his body is a product of the five material elements. Hence it is believed that the real soul is separate from the body he sees and is unborn and immortal.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥