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bhagavat 12.4.9: फिर प्रलय की विशाल अग्नि भगवान संकर्षण के मुख से धधक उठेगी। वायु के प्रबल वेग से ले जाई गई, यह अग्नि सारे ब्रह्माण्ड में जल उठेगी और निर्जीव विराट खोल को झुलसा देगी।   |   bhagavat अध्याय 12.4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.4.9 
तत: संवर्तको वह्नि: सङ्कर्षणमुखोत्थित: ।
दहत्यनिलवेगोत्थ: शून्यान् भूविवरानथ ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
फिर प्रलय की विशाल अग्नि भगवान संकर्षण के मुख से धधक उठेगी। वायु के प्रबल वेग से ले जाई गई, यह अग्नि सारे ब्रह्माण्ड में जल उठेगी और निर्जीव विराट खोल को झुलसा देगी।
 
After this, the great fire of destruction will blaze from the mouth of Lord Sankarshana. Carried by the great velocity of the wind, this fire will scorch the lifeless giant shell and burn throughout the universe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)