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bhagavat 12.4.39: हे कुरुश्रेष्ठ, मैंने तुम्हें श्री नारायण की लीलाओं के बारे में कुछ संक्षिप्त कथाएँ बताई हैं। भगवान ही इस जगत के निर्माता और सभी जीवों के परम आधार हैं। स्वयं ब्रह्मा जी भी इन कथाओं को पूर्ण रूप से वर्णन करने में समर्थ नहीं हैं।   |   bhagavat अध्याय 12.4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.4.39 
एता: कुरुश्रेष्ठ जगद्विधातु-
र्नारायणस्याखिलसत्त्वधाम्न: ।
लीलाकथास्ते कथिता: समासत:
कार्त्स्‍न्येन नाजोऽप्यभिधातुमीश: ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ, मैंने तुम्हें श्री नारायण की लीलाओं के बारे में कुछ संक्षिप्त कथाएँ बताई हैं। भगवान ही इस जगत के निर्माता और सभी जीवों के परम आधार हैं। स्वयं ब्रह्मा जी भी इन कथाओं को पूर्ण रूप से वर्णन करने में समर्थ नहीं हैं।
 
O best of the Kurus, I have told you briefly these stories of the lilaas of Lord Narayana. The Lord is the creator of this universe and the ultimate abode of all living entities. Even Brahma is incapable of narrating these stories in full.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)