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bhagavat 12.4.35: हे शत्रुओं के विजेता, प्रकृति की सूक्ष्म क्रियाविधियों को जानने वाले विद्वानों ने कहा है कि ब्रह्मा आदि सभी सृजित प्राणी निरंतर उत्पत्ति और विनाश की प्रक्रिया में बने रहते हैं। यह प्रक्रिया सतत जारी रहती है।   |   bhagavat अध्याय 12.4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.4.35 
नित्यदा सर्वभूतानां ब्रह्मादीनां परन्तप ।
उत्पत्तिप्रलयावेके सूक्ष्मज्ञा: सम्प्रचक्षते ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं के विजेता, प्रकृति की सूक्ष्म क्रियाविधियों को जानने वाले विद्वानों ने कहा है कि ब्रह्मा आदि सभी सृजित प्राणी निरंतर उत्पत्ति और विनाश की प्रक्रिया में बने रहते हैं। यह प्रक्रिया सतत जारी रहती है।
 
O suppressor of enemies, those who know the subtle workings of Nature have declared that the processes of creation and destruction continue uninterrupted and all beings including Brahma are constantly affected by them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)