Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.4.32: यद्यपि बादल सूर्य का ही एक उत्पाद है और सूर्य द्वारा ही दृश्य होता है, लेकिन यह आँख के लिए, जो कि सूर्य का ही एक अंश है, अंधेरा पैदा कर देता है। इसी प्रकार, मिथ्या अहंकार, परब्रह्म की एक विशेष उपज है, जिसे परब्रह्म द्वारा ही देखा जाता है, आत्मा को परब्रह्म का अनुभव करने से रोकता है, यद्यपि आत्मा भी परब्रह्म का ही एक अंश है। | bhagavat अध्याय 12.4: ब्रह्माण्ड के प्रलय की चार कोटियाँ । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा घनोऽर्कप्रभवोऽर्कदर्शितो
ह्यर्कांशभूतस्य च चक्षुषस्तम: ।
एवं त्वहं ब्रह्मगुणस्तदीक्षितो
ब्रह्मांशकस्यात्मन आत्मबन्धन: ॥ ३२ ॥
अनुवाद
यद्यपि बादल सूर्य का ही एक उत्पाद है और सूर्य द्वारा ही दृश्य होता है, लेकिन यह आँख के लिए, जो कि सूर्य का ही एक अंश है, अंधेरा पैदा कर देता है। इसी प्रकार, मिथ्या अहंकार, परब्रह्म की एक विशेष उपज है, जिसे परब्रह्म द्वारा ही देखा जाता है, आत्मा को परब्रह्म का अनुभव करने से रोकता है, यद्यपि आत्मा भी परब्रह्म का ही एक अंश है।
Though the clouds are the product of the Sun and are made visible by the Sun, they create darkness for the seeing eye which is another part of the Sun. Similarly, the false ego which is the special product of the Supreme Brahman and is made visible by the Supreme Brahman prevents the soul from realizing the Supreme Brahman, though the soul is also a part of the Supreme Brahman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥