श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 3: भूमि गीत  »  श्लोक 9-13
 
 
श्लोक  12.3.9-13 
पृथु: पुरूरवा गाधिर्नहुषो भरतोऽर्जुन: ।
मान्धाता सगरो राम: खट्‌वाङ्गो धुन्धुहा रघु: ॥ ९ ॥
तृणबिन्दुर्ययातिश्च शर्याति: शन्तनुर्गय: ।
भगीरथ: कुवलयाश्व: ककुत्स्थो नैषधो नृग: ॥ १० ॥
हिरण्यकशिपुर्वृत्रो रावणो लोकरावण: ।
नमुचि: शम्बरो भौमो हिरण्याक्षोऽथ तारक: ॥ ११ ॥
अन्ये च बहवो दैत्या राजानो ये महेश्वरा: ।
सर्वे सर्वविद: शूरा: सर्वे सर्वजितोऽजिता: ॥ १२ ॥
ममतां मय्यवर्तन्त कृत्वोच्चैर्मर्त्यधर्मिण: ।
कथावशेषा: कालेन ह्यकृतार्था: कृता विभो ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
“पृथु, पुरूरवा, गाधि, नहुष, भरत, कार्तवीर्य अर्जुन, मान्धाता, सगर, राम, खट्वांग, धुन्धुहा, रघु, तृणबिन्दु, ययाति, शर्याति, शन्तनु, गय, भगीरथ, कुवलयाश्व, ककुत्स्थ, नैषध, नृग, हिरण्यकशिपु, वृत्र, पूरे जग को रुलाने वाला रावण, नमुचि, शम्बर, भौम, हिरण्याक्ष और तारक के साथ-साथ और भी कई असुर और राजा थे जो दूसरों पर शासन करने की महान शक्ति रखते थे। ये सभी ज्ञानी, शूरवीर, सबको जीतने वाले और अजेय थे। लेकिन हे सर्वशक्तिमान प्रभु, ये सारे राजा मेरी प्राप्ति के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते थे, लेकिन समय के अधीन थे जिसने उन सभी को केवल ऐतिहासिक वृत्तांत बना दिया। उनमें से कोई भी अपना शासन स्थायी रूप से स्थापित नहीं कर सका।"
 
“Prithu, Pururava, Gadhi, Nahush, Bharat, Kartavirya Arjun, Mandhata, Sagar, Ram, Khatwang, Dhundhuha, Raghu, Trinabindu, Yayati, Sharyati, Shantanu, Gaya, Bhagiratha, Kuvalyashwa, Kakutstha, Naishadha, Nrig, Hiranyakashipu, Vritra, Ravana who makes the whole world cry, Namuchi, Shambara, Bhauma, Hiranyaksha and Taraka, all of them having great power to rule over others, were wise, brave and invincible. Yet, O Almighty, all these kings lived their lives trying hard to attain me, but all of them were reduced to mere historical accounts. Not a single one of them could establish his rule permanently.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, और श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने पुष्टि की, यहाँ जिस राजा राम का उल्लेख किया गया है वह भगवान रामचंद्र का अवतार नहीं है। पृथु महाराज को भगवान का अवतार समझा जाता है जिन्होंने एक धरती के राजा की विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया, पूरी पृथ्वी पर स्वामित्व का दावा किया। हालाँकि, पृथु महाराज जैसे संत राजा, भगवान की ओर से पृथ्वी को नियंत्रित करते हैं, जबकि हिरण्यकशिपु या रावण जैसे राक्षस अपनी व्यक्तिगत इंद्रिय तृप्ति के लिए पृथ्वी का शोषण करने का प्रयास करते हैं। फिर भी, संत राजा और राक्षस दोनों को ही पृथ्वी छोड़ देनी होगी। इस तरह, समय के बल से उनकी राजनीतिक सर्वोच्चता अंततः बेअसर हो जाती है।

आधुनिक राजनीतिक नेता पृथ्वी को अस्थायी रूप से भी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, न ही उनकी संपन्नता और बुद्धि असीमित है। निराशाजनक रूप से खंडित शक्ति रखने, एक छोटे जीवन काल का आनंद लेने और गहरी अस्तित्वगत बुद्धि की कमी के कारण, आधुनिक नेता अनिवार्य रूप से कुंठा और गुमराह महत्वाकांक्षा के प्रतीक हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)