श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 3: भूमि गीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.3.8 
ममैवेयं मही कृत्स्‍ना न ते मूढेति वादिन: ।
स्पर्धमाना मिथो घ्नन्ति म्रियन्ते मत्कृते नृपा: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
“राजनीतिक लोग एक-दूसरे को चुनौती देते हैं: ‘यह सारी ज़मीन मेरी है। मूर्ख, यह तुम्हारी नहीं!’ इस प्रकार वे एक-दूसरे पर आक्रमण करते हैं और मर जाते हैं।
 
“The politicians challenge each other, “All this land is mine. You fool. It is not yours.” So they attack each other and die.
तात्पर्य
यह पद उस सांसारिक राजनीतिक मानसिकता का शानदार स्पष्टता के साथ वर्णन करता है जो दुनिया में असंख्य संघर्षों को भड़काती है। उदाहरण के लिए, जैसा कि हम श्रीमद्-भागवतम् का यह अनुवाद तैयार करते हैं, ब्रिटिश और अर्जेंटीना सैन्य बल छोटे से फ़ॉकलैंड द्वीप पर कटुता से लड़ रहे हैं।

तथ्य यह है कि सर्वोच्च प्रभु सभी भूमि के स्वामी हैं। बेशक, ईश्वर-भयभीत भूमि में भी राजनीतिक सीमाएँ मौजूद हैं। लेकिन ऐसे ईश्वर-भयभीत वातावरण में राजनीतिक तनाव बहुत कम हो जाते हैं, और सभी देशों के लोग एक-दूसरे का स्वागत करते हैं और शांति से जीने के एक-दूसरे के अधिकार का सम्मान करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)