श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 3: भूमि गीत  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.3.51 
कलेर्दोषनिधे राजन्नस्ति ह्येको महान् गुण: ।
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसङ्ग: परं व्रजेत् ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज, यद्यपि कलियुग दोषों का सागर है, फिर भी इस युग की एक अच्छी विशेषता है: केवल हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने से व्यक्ति भौतिक बंधन से मुक्त हो जाता है और दिव्य लोक में पहुँच जाता है।
 
O King, although Kali-yuga is a sea of ​​defects, yet there is one good quality in this age—simply by chanting the Hare Krsna mahamantra, one is released from the bondage of material existence and attains the transcendental abode.
तात्पर्य
कली युग के अनेकानेक दोषों का उल्लेख करन के बाद, अब श्री शुकदेव गोस्वामी इसके एक उज्जवल पहलू का वर्णन करते हैं। जैसे एक शक्तिशाली राजा असंख्य चोरों को मार सकता है, एक तेजस्वी आध्यात्मिक गुण इस युग के सभी संदूषणों को नष्ट कर सकता है। विशेष रूप से इस भ्रष्ट युग में, हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे / हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे का जप करने के महत्व का वर्णन करना असंभव है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)