इस युग में छोटे बच्चों को भी अनेक प्रकार से सताया जाता है। हाल के वर्षों में बच्चों में आत्महत्या की दर बढ़ी है क्योंकि उनका जन्म प्रेमी, धार्मिक माता-पिता से नहीं बल्कि स्वार्थी, गर्हित पुरुषों और महिलाओं से हुआ है। सच तो यह है कि बच्चे अक्सर तब भी पैदा हो जाते हैं जब जन्म नियंत्रण की गोलियाँ, परिरक्षक या कोई अन्य गर्भनिरोधक उपकरण ठीक से काम नहीं करता है। ऐसी परिस्थितियों में आजकल माता-पिता के लिए अपने बच्चों को नैतिक मार्गदर्शन देना बहुत कठिन हो गया है। आम तौर पर आध्यात्मिक विज्ञान से अनभिज्ञ माता-पिता अपने बच्चों को मुक्ति के मार्ग पर नहीं ले जा पाते हैं और इस तरह पारिवारिक जीवन में अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं।
जैसा कि इस श्लोक में भविष्यवाणी की गई है, व्यभिचार आम हो गया है, और सामान्य लोग खाने-पीने और सेक्स को ही सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं, वे परम सत्य को जानने को कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं।
