श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 3: भूमि गीत  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.3.30 
यदा मायानृतं तन्द्रा निद्रा हिंसा विषादनम् ।
शोकमोहौ भयं दैन्यं स कलिस्तामस: स्मृत: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जब कपट, झूठ, तन्द्रा, निद्रा, हिंसा, विषाद, शोक, मोह, भय और दरिद्रता का बोलबाला होता है, उस युग को कलियुग या तमोगुण का युग कहा जाता है।
 
When deception, lies, drowsiness, sleep, violence, sadness, grief, attachment, fear and poverty prevail, that age is Kaliyuga, i.e. the age of Tamoguna.
तात्पर्य
कलियुग में, लोग लगभग पूरी तरह से भौतिकवाद में डूबे रहते हैं, जिसमें स्वाध्याय की कोई इच्छा नहीं होती।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)