पूर्वं निर्जित्य षड्वर्गं जेष्यामो राजमन्त्रिण: ।
तत: सचिवपौराप्तकरीन्द्रानस्य कण्टकान् ॥ ३ ॥
एवं क्रमेण जेष्याम: पृथ्वीं सागरमेखलाम् ।
इत्याशाबद्धहृदया न पश्यन्त्यन्तिकेऽन्तकम् ॥ ४ ॥
अनुवाद
"राजा और राजनीतिज्ञ अपनी कल्पना में सोचते हैं, "सबसे पहले मैं अपनी इन्द्रियों और मन को जीतूँगा; फिर मैं अपने मुख्य मंत्रियों को दबाऊँगा और सलाहकारों, नागरिकों, मित्रों और रिश्तेदारों के काँटे जैसी चुभन से और हाथियों के रखवालों से खुद को मुक्त कर लूँगा। इस तरह धीरे धीरे मैं पूरी पृथ्वी को जीत लूँगा।" चूँकि इन नेताओं के हृदय बड़ी आशाओं से बंधे रहते हैं, वे नज़दीक खड़ी प्रतीक्षारत मृत्यु को नहीं देख पाते।
“Kings and politicians imagine, ‘First I will conquer my senses and mind; then I will subdue my chief ministers and rid myself of the thorns of my advisers, citizens, friends and relatives, and the caretakers of my elephants. In this way I will gradually conquer the whole earth.’ Because these leaders have high hopes in their hearts, they do not see death waiting just around the corner.
तात्पर्य
अपनी सत्ता के लालच को पूरा करने के लिए, दृढ़निष्ठी राजनेता, तानाशाह और सैन्य नेता कठोर तपस्या से गुजरते हैं, बड़ी आत्मसंयम के साथ बलिदान देते हैं। फिर वे समुद्र, जमीन, हवा और अंतरिक्ष को नियंत्रित करने के संघर्ष में अपने महान राष्ट्रों का नेतृत्व करते हैं। हालाँकि राजनेता और उनके अनुयायी जल्द ही मर जाएँगे - क्योंकि इस संसार में जन्म और मृत्यु सभी अपरिहार्य हैं - वे क्षणभंगुर गौरव के लिए अपने उन्मादी संघर्ष में लगे रहते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥