त्रेतायां धर्मपादानां तुर्यांशो हीयते शनै: ।
अधर्मपादैरनृतहिंसासन्तोषविग्रहै: ॥ २० ॥
अनुवाद
त्रेतायुग में झूठ, हिंसा, असंतोष और कलह के चार स्तंभों के प्रभाव से धर्म के प्रत्येक पैर में क्रमशः एक चौथाई की कमी होती जाती है।
In the Treta Yuga, due to the influence of the four legs of Adharma – lies, violence, discontent and strife – each leg of Dharma gradually weakens by one-fourth.
तात्पर्य
असत्य से सत्य का नाश, हिंसा से क्षमा का नाश, असंतोष से तप का नाश और कलह से दान और स्वच्छता का नाश होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥