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bhagavat 12.3.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के प्रयासों में लगे इस धरती के राजाओं को देखकर पृथ्वी हँसी। उसने कहा: "देखो, मृत्यु के हाथों में खिलौनों की तरह मौजूद ये राजा मुझ पर विजय पाने की इच्छा कर रहे हैं!"   |   bhagavat अध्याय 12.3: भूमि गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 3: भूमि गीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.3.1 
श्री शुक उवाच
द‍ृष्ट्वात्मनि जये व्यग्रान् नृपान् हसति भूरियम् ।
अहो मा विजिगीषन्ति मृत्यो: क्रीडनका नृपा: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के प्रयासों में लगे इस धरती के राजाओं को देखकर पृथ्वी हँसी। उसने कहा: "देखो, मृत्यु के हाथों में खिलौनों की तरह मौजूद ये राजा मुझ पर विजय पाने की इच्छा कर रहे हैं!"
 
Sukadeva Goswami said: Seeing the kings of this world busy trying to conquer her, the earth began to laugh. She said: “Just look at these kings who are like toys in the hands of death, wishing to conquer me!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)