शाकमूलामिषक्षौद्रफलपुष्पाष्टिभोजना: ।
अनावृष्टया विनङ्क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिता: ॥ ९ ॥
अनुवाद
अकाल और ज्यादा करों से तंग आकर लोग पत्तियां, जड़ें, मांस, जंगली शहद, फल, फूल और बीज खाने को मजबूर होंगे। सूखे की वजह से वे पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।
People oppressed by famine and excessive taxes will be forced to eat leaves, roots, meat, wild honey, fruits, flowers and seeds. Suffering from drought, they will perish completely.
तात्पर्य
श्रीमद्भागवतम हमारे ग्रह के भविष्य के बारे में आधिकारिक रूप से वर्णन करता है। जैसे पेड़ या पौधे से टूटा पत्ता सूख जाता है, कुम्हला जाता है और विघटित हो जाता है, वैसे ही जब मानव समाज परम भगवान से विच्छिन्न हो जाता है, तब वह हिंसा और अराजकता में सूख जाता है और विघटित हो जाता है। हमारे कंप्यूटर और रॉकेट के बावजूद, अगर परम भगवान बारिश नहीं भेजेंगे तो हम सभी भूखे मर जाएँगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥