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प्रजा हि लुब्धै राजन्यैर्निर्घृणैर्दस्युधर्मभि: ।
आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम् ॥ ८ ॥
अनुवाद
ऐसे लालची और क्रूर शासकों के शासन में, जो आम चोरों से भी बदतर हैं, नागरिकों की पत्नियों और संपत्ति का हरण कर लिया जाएगा और वे पर्वतों और जंगलों की ओर भाग जाएंगे।
The people will flee to the mountains and forests when their wives and property are taken away by greedy and ruthless rulers who will behave like common thieves.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥