इस युग में, लोग अपने बालों को विभिन्न शैलियों में निरंतर व्यवस्थित करते हैं | वे केवल चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए प्रयास करते है | वे नहीं जानते कि वास्तविक सुंदरता हृदय से आती है, आत्मा से आती है और केवल वही व्यक्ति सही मायनों में आकर्षक है जो शुद्ध है। जैसे जैसे इस युग की कठिनाइयाँ बढ़ती जाती है, पेट भरना ही सफलता की निशानी होगी और जो अपने परिवार का भरण पोषण कर सकता है उसे आर्थिक मामलों में बुद्धिमान माना जाएगा। धर्म का पालन केवल प्रतिष्ठा के लिए और भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व को समझे बिना किया जाएगा।
