Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.2.39: इस धरती पर जीवों के बीच चार युगों - सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग - का चक्र निरंतर चलता रहता है, जिसके कारण घटनाओं का समान सामान्य क्रम दोहराता रहता है। | bhagavat अध्याय 12.2: कलियुग के लक्षण । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस धरती पर जीवों के बीच चार युगों - सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग - का चक्र निरंतर चलता रहता है, जिसके कारण घटनाओं का समान सामान्य क्रम दोहराता रहता है।
The cycle of the four ages—Satya, Treta, Dvapara and Kali—continues among the living beings on this earth, giving rise to the same general sequence of events.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥