यावत् स पादपद्माभ्यां स्पृशनास्ते रमापति: ।
तावत् कलिर्वै पृथिवीं पराक्रन्तुं न चाशकत् ॥ ३० ॥
अनुवाद
जब तक देवी लक्ष्मी के पति, भगवान श्री कृष्ण अपने कमल जैसे पैरों से पृथ्वी को छूते रहे, तब तक कलि इस दुनिया को अपने वश में करने में असमर्थ रहा।
As long as Lord Krishna, the husband of Lakshmi, kept touching the earth with his lotus feet, Kali was unable to suppress this world.
तात्पर्य
यद्यपि स्वामी कृष्ण के पृथ्वी पर रहने के दौरान भी दुर्योधन और उसके सहयोगियों के अधर्मी कृत्यों के द्वारा काली पृथ्वी पर कुछ हद तक प्रवेश कर चुका था, लेकिन स्वामी कृष्ण लगातार काली के प्रभाव का दमन करते रहे। जब तक स्वामी कृष्ण पृथ्वी पर रहे, तब तक काली का विकास नहीं हो सका।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥