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bhagavat 12.2.17: भगवान विष्णु - परमेश्वर, सभी गतिशील और स्थिर जीवों के आध्यात्मिक गुरु, और सभी की परम आत्मा - धर्म के सिद्धांतों की रक्षा करने और अपने संत भक्तों को भौतिक कार्यों की प्रतिक्रियाओं से मुक्ति दिलाने के लिए जन्म लेते हैं।   |   bhagavat अध्याय 12.2: कलियुग के लक्षण   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 2: कलियुग के लक्षण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.2.17 
चराचरगुरोर्विष्णोरीश्वरस्याखिलात्मन: ।
धर्मत्राणाय साधूनां जन्म कर्मापनुत्तये ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु - परमेश्वर, सभी गतिशील और स्थिर जीवों के आध्यात्मिक गुरु, और सभी की परम आत्मा - धर्म के सिद्धांतों की रक्षा करने और अपने संत भक्तों को भौतिक कार्यों की प्रतिक्रियाओं से मुक्ति दिलाने के लिए जन्म लेते हैं।
 
Lord Vishnu, who is the Guru of all living and non-living beings and the Supreme Being of all, takes birth to protect Dharma and to liberate His saintly devotees from the consequences of material actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)