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bhagavat 12.11.9: जिस प्रकार इस संसार के एक साधारण व्यक्ति के आकार-प्रकार को उसके विभिन्न अंगों को नापकर निर्धारित किया जा सकता है, उसी प्रकार महापुरुष के विराट रूप के भीतर लोकों की व्यवस्था को मापकर महापुरुष के आकार-प्रकार को जाना जा सकता है।   |   bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.11.9 
यावानयं वै पुरुषो यावत्या संस्थया मित: ।
तावानसावपि महापुरुषो लोकसंस्थया ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार इस संसार के एक साधारण व्यक्ति के आकार-प्रकार को उसके विभिन्न अंगों को नापकर निर्धारित किया जा सकता है, उसी प्रकार महापुरुष के विराट रूप के भीतर लोकों की व्यवस्था को मापकर महापुरुष के आकार-प्रकार को जाना जा सकता है।
 
Just as the shape and size of an ordinary man in this world can be determined by measuring his various body parts, in the same way the shape and size of a great man can be known by measuring the arrangement of the worlds under the gigantic form of the great man.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)