Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 12.11.40: तपस्या मास पर, ऋतु यक्ष के रूप में, वर्चा राक्षस के रूप में, भरद्वाज मुनि के रूप में, पर्जन्य सूर्य देव के रूप में, सेनजित अप्सरा के रूप में, विश्व गन्धर्व के रूप में और ऐरावत नाग के रूप में अपना शासन चलाते हैं।   |   bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.11.40 
ऋतुर्वर्चा भरद्वाज: पर्जन्य: सेनजित्तथा ।
विश्व ऐरावतश्चैव तपस्याख्यं नयन्त्यमी ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
तपस्या मास पर, ऋतु यक्ष के रूप में, वर्चा राक्षस के रूप में, भरद्वाज मुनि के रूप में, पर्जन्य सूर्य देव के रूप में, सेनजित अप्सरा के रूप में, विश्व गन्धर्व के रूप में और ऐरावत नाग के रूप में अपना शासन चलाते हैं।
 
On the month called Tapasya, they rule in the form of Ritu Yaksha, Varcha Raksha, Bharadwaj Muni, Parjanya Sun God, Senjit Apsara, Vishwa Gandharva and Airavat Naga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)