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bhagavat 12.11.32: भगवान अपनी कालशक्ति को सूर्य देव के रूप में प्रकट करके मधु आदि बारहों महीनों में ब्रह्माण्ड के भीतर ग्रहों की गति को नियंत्रित करने हेतु इधर-उधर यात्रा करते हैं। इन बारहों महीनों में सूर्यदेव के साथ यात्रा करने वाले छह साथियों का एक अलग समूह है।   |   bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.11.32 
मध्वादिषु द्वादशसु भगवान् कालरूपधृक् ।
लोकतन्त्राय चरति पृथग्द्वादशभिर्गणै: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान अपनी कालशक्ति को सूर्य देव के रूप में प्रकट करके मधु आदि बारहों महीनों में ब्रह्माण्ड के भीतर ग्रहों की गति को नियंत्रित करने हेतु इधर-उधर यात्रा करते हैं। इन बारहों महीनों में सूर्यदेव के साथ यात्रा करने वाले छह साथियों का एक अलग समूह है।
 
Bhagwan manifests his time power in the form of Sun God and travels here and there in the twelve months of the year to regulate the motion of the planets in the universe like Madhu etc. There are six separate groups of companions who travel with Sun God in the twelve months of the year.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)