Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.11.31: हे शौनक, माया के स्रोत होने के कारण भगवान हरि का विस्तार रूप सूर्य देव को नौ पहलुओं में वर्णित किया गया है - समय, स्थान, प्रयास, कर्ता, उपकरण, विशिष्ट अनुष्ठान, शास्त्र, पूजा की सामग्री और प्राप्त होने वाले फल। | bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कालो देश: क्रिया कर्ता करणं कार्यमागम: ।
द्रव्यं फलमिति ब्रह्मन् नवधोक्तोऽजया हरि: ॥ ३१ ॥
अनुवाद
हे शौनक, माया के स्रोत होने के कारण भगवान हरि का विस्तार रूप सूर्य देव को नौ पहलुओं में वर्णित किया गया है - समय, स्थान, प्रयास, कर्ता, उपकरण, विशिष्ट अनुष्ठान, शास्त्र, पूजा की सामग्री और प्राप्त होने वाले फल।
O Shaunaka, being the source of Maya, the Sun God, who is the part and parcel of Lord Hari, has been described in nine ways - according to the time, place, action, doer, instrument, ritual, scripture, paraphernalia of worship and the fruit to be obtained.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥