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bhagavat 12.11.30: भगवान् हरि से एकाकार होने के कारण सूर्य देवता संपूर्ण जगत और उनके प्रथम रचयिता की एकमात्र आत्मा हैं। वे वेदों द्वारा बताए गए समस्त कर्मकांडों के मूल हैं और वैदिक ऋषियों ने उन्हें विभिन्न नामों से संबोधित किया है।   |   bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.11.30 
एक एव हि लोकानां सूर्य आत्मादिकृद्धरि: ।
सर्ववेदक्रियामूलमृषिभिर्बहुधोदित: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् हरि से एकाकार होने के कारण सूर्य देवता संपूर्ण जगत और उनके प्रथम रचयिता की एकमात्र आत्मा हैं। वे वेदों द्वारा बताए गए समस्त कर्मकांडों के मूल हैं और वैदिक ऋषियों ने उन्हें विभिन्न नामों से संबोधित किया है।
 
Being inseparable from Lord Hari, the Sun God is the single soul of all the worlds and their original creator. He is the source of all the rituals prescribed in the Vedas and the Vedic sages have given him various names.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)