श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  12.11.27-28 
श्रीशौनक उवाच
शुको यदाह भगवान् विष्णुराताय श‍ृण्वते ।
सौरो गणो मासि मासि नाना वसति सप्तक: ॥ २७ ॥
तेषां नामानि कर्माणि नियुक्तानामधीश्वरै: ।
ब्रूहि न: श्रद्दधानानां व्यूहं सूर्यात्मनो हरे: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शौनक ने कहा : कृपया हमारे लिए सूर्य देव के सात स्वरूपों और प्रत्येक माह में उनके साथ जुड़े साथियों के विभिन्न समूहों का वर्णन करें, जिनमें उनके नाम और कार्य शामिल हों। सूर्य देव के साथी, जो अपने स्वामी की सेवा करते हैं, वे सूर्य देव के अधिष्ठात्री देवता के रूप में भगवान हरि के विस्तार हैं।
 
Sri Saunaka said: Please describe to us, who have great respect for your words, the seven material forms and the various groups of companions that the Sun God displays every month, along with their names and activities. The companions of the Sun God, who serve their master, are the incarnations of Lord Hari as the presiding deity of the Sun God.
तात्पर्य
शुकदेव गोस्वामी और महाराज परीक्षित के बीच की उच्चार्पित बातचीत का वर्णन सुनने के बाद, शौनक अब सूर्य के बारे में सर्वोच्च भगवान के विस्तार के रूप में पूछताछ करते हैं। यद्यपि सूर्य सभी ग्रहों का राजा है, श्री शौनक इस तेजस्वी ग्लोब में विशेष रूप से ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व श्री हरि के विस्तार के रूप में रुचि रखते हैं।

सूर्य से संबंधित व्यक्तित्व सात श्रेणियों के होते हैं। सूर्य की कक्षा के दौरान बारह महीने होते हैं, और प्रत्येक महीने में एक अलग सूर्य-देव और उनके छह सहयोगियों का एक अलग समूह अध्यक्षता करता है। वैशाख से शुरू होने वाले बारह महीनों में से प्रत्येक में स्वयं सूर्य-देव, ऋषि, यक्ष, गंधर्व, अप्सरा, राक्षस और नाग के लिए अलग-अलग नाम होते हैं, जो कुल सात श्रेणियां बनाते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)