Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.11.22: भगवान को जाग्रत, सुप्त और सुषुप्ति अवस्थाओं के रूप में समझा जा सकता है, जो क्रमशः बाहरी वस्तुओं, मन और भौतिक बुद्धि से कार्य करते हैं। एक चौथा आयाम भी है, जो चेतना का पारलौकिक स्तर है और शुद्ध ज्ञान की विशेषता वाला है। | bhagavat अध्याय 12.11: महापुरुष का संक्षिप्त वर्णन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विश्वस्तैजस: प्राज्ञस्तुरीय इति वृत्तिभि: ।
अर्थेन्द्रियाशयज्ञानैर्भगवान् परिभाव्यते ॥ २२ ॥
अनुवाद
भगवान को जाग्रत, सुप्त और सुषुप्ति अवस्थाओं के रूप में समझा जा सकता है, जो क्रमशः बाहरी वस्तुओं, मन और भौतिक बुद्धि से कार्य करते हैं। एक चौथा आयाम भी है, जो चेतना का पारलौकिक स्तर है और शुद्ध ज्ञान की विशेषता वाला है।
Man can visualize God in the waking, sleeping and deep sleeping states, which operate through external objects, the mind and the physical intellect respectively. There is also a fourth state, which is the transcendental level of consciousness and is characterized by pure knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥