परमात्मा हरिः देवः
तच्चक्तिः श्रीर् इहोदिता
श्रीर् देवी प्रकृतिः प्रोक्ता
केशवः पुरुषः स्मृतः
न विष्णुना विना देवी
न हरिः पद्मजां विना
“परमात्मा भगवान हरि हैं, और उनकी शक्ति को इस संसार में श्री के नाम से जाना जाता है। देवी श्री को प्रकृति के रूप में जाना जाता है, और सर्वोच्च भगवान केशव को पुरुष के रूप में जाना जाता है। दिव्य देवी कभी भी उनके बिना उपस्थित नहीं होती है, और न ही वे कभी उनके बिना प्रकट होते हैं।"
इसके अलावा, श्री विष्णु पुराण (1.8.15) में कहा गया है:
नित्यैव सा जगन्मता
विष्णोर श्रीर नपायानी
यथा सर्वगतो विष्णुर
तथैवैष्यं द्विजोत्तमाः
“वह ब्रह्मांड की शाश्वत माता हैं, भगवान विष्णु की भाग्य की देवी हैं, और वह कभी भी उनसे अलग नहीं होती है। जिस तरह भगवान विष्णु सर्वत्र विद्यमान हैं, उसी तरह वह भी सर्वत्र विराजमान हैं, हे ब्राह्मणश्रेष्ठ।"
विष्णु पुराण (1.9.140) में भी:
एवं यथा जगत्स्वामी
देवदेवो जनार्दनः
अवतारं करोत्येव
तथा श्रीस् तत्सहायिनी
“इस प्रकार, जिस प्रकार ब्रह्मांड के स्वामी, देवताओं के देवता, जनार्दन इस दुनिया में अवतरित होते हैं, उसी तरह उनकी पत्नी, भाग्य की देवी भी अवतरित होती हैं।”
भाग्य की देवी की विशुद्ध आध्यात्मिक स्थिति का वर्णन स्कंद पुराण में किया गया है:
अपारं त्वक्षरं या सा
प्रकृतिर्जडरूपिका
श्रीः परा प्रकृतिः प्रोक्ता
चेतना विष्णुसंश्रया
तमक्षरं परं प्राहुः
परतः परमक्षरम्
हरिरेवाखिलगुणोऽपि
अक्षरत्रयं ईरितम्
"निम्न अचूक प्राणी वह प्रकृति है जो भौतिक दुनिया के रूप में प्रकट होती है। दूसरी ओर, भाग्य की देवी को श्रेष्ठ प्रकृति के रूप में जाना जाता है। वह शुद्ध चेतना है और भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष संरक्षण में है। जबकि उन्हें श्रेष्ठ अचूक प्राणी कहा जाता है, वह अचूक प्राणी जो सबसे बड़ा है, वह स्वयं भगवान हरि हैं, जो सभी पारलौकिक गुणों के मूल स्वामी हैं। इस तरह, तीन अलग-अलग अचूक संस्थाओं का वर्णन किया गया है।"
इस प्रकार, यद्यपि भगवान की निम्नतर ऊर्जा अपने कार्य में अचूक है, अस्थायी भ्रामक वैभव प्रकट करने की उसकी शक्ति आंतरिक ऊर्जा, भाग्य की देवी की कृपा से मौजूद है, जो सर्वोच्च भगवान की पत्नी है।
पद्म पुराण (256.9-21) में भगवान के अठारह द्वारपालों को सूचीबद्ध किया गया है: नंद, सुनंद, जय, विजय, चंड, प्रचंड, भद्र, सुभद्र, धाता, विधाता, कुमुद, कुमुदाक्ष, पुंडरीकाक्ष, वामन, शंखकर्न, सर्वनेत्र, सुमुख और सुप्रतिष्ठित।
