मण्डलं देवयजनं दीक्षा संस्कार आत्मन: ।
परिचर्या भगवत आत्मनो दुरितक्षय: ॥ १७ ॥
अनुवाद
सूर्य मंडल वह स्थान है जहाँ परमेश्वर की आराधना की जाती है, दीक्षा आत्मा की पवित्रता का साधन है, और भगवान को भक्ति अर्पित करना ही सभी पापों को जड़ से ख़त्म करने का तरीका है।
The solar system is the place where God is worshipped; initiation is the means of purifying the soul and devotion to God is the method of eradicating one's sins.
तात्पर्य
एक को अपने मन में सूर्य मंडल को एक ऐसी जगह की तरह रखना चाहिए जहां पर भगवान की आराधना की जाती है। भगवान कृष्ण सभी दिव्य प्रकाश के भंडार हैं, और इस तरह से यह उपयुक्त है कि उनको तेजस्वी सूर्य पर उचित रूप से पूजा जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥