ओज:सहोबलयुतं मुख्यतत्त्वं गदां दधत् ।
अपां तत्त्वं दरवरं तेजस्तत्त्वं सुदर्शनम् ॥ १४ ॥
नभोनिभं नभस्तत्त्वमसिं चर्म तमोमयम् ।
कालरूपं धनु: शार्ङ्गं तथा कर्ममयेषुधिम् ॥ १५ ॥
अनुवाद
भगवान की गदा इन्द्रिय, मन और शरीर की शक्तियों से युक्त मुख्य तत्व प्राण है। उनका उत्तम शंख जल तत्व है। उनका सुदर्शन चक्र अग्नि तत्व है और उनकी तलवार, जो आकाश के समान निर्मल है, आकाश तत्व है। उनकी ढाल तमोगुण का प्रतीक है, उनका शाङ्रग नामक धनुष समय का प्रतीक है और उनका तरकस कर्मेन्द्रियों का प्रतीक है।
भगवान की गदा इन्द्रिय, मन और शरीर की शक्तियों से युक्त मुख्य तत्व प्राण है। उनका उत्तम शंख जल तत्व है। उनका सुदर्शन चक्र अग्नि तत्व है और उनकी तलवार, जो आकाश के समान निर्मल है, आकाश तत्व है। उनकी ढाल तमोगुण का प्रतीक है, उनका शाङ्रग नामक धनुष समय का प्रतीक है और उनका तरकस कर्मेन्द्रियों का प्रतीक है।