Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 12.10.4: ऋषि को देख कर देवी उमा ने भगवान् गिरिश से कहा, "प्रियतम, यह देखो, ये विद्वान ब्राह्मण समाधि में लीन हैं। उनका शरीर, मन और इंद्रियाँ सभी निश्चल हैं।"   |   bhagavat अध्याय 12.10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.10.4 
अथोमा तमृषिं वीक्ष्य गिरिशं समभाषत ।
पश्येमं भगवन् विप्रं निभृतात्मेन्द्रियाशयम् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषि को देख कर देवी उमा ने भगवान् गिरिश से कहा, "प्रियतम, यह देखो, ये विद्वान ब्राह्मण समाधि में लीन हैं। उनका शरीर, मन और इंद्रियाँ सभी निश्चल हैं।"
 
Seeing the sage, Goddess Uma said to Lord Girish, “O Lord, just look at this learned Brahmin, his body, mind and senses are still in meditation.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)