श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.10.35 
सूत उवाच
इत्यर्चितोऽभिष्टुतश्च मुनिना सूक्तया गिरा ।
तमाह भगवाञ्छर्व: शर्वया चाभिनन्दित: ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
सूत गोस्वामी ने कहा: मुनि मार्कण्डेय के वाक्पटु बोलों द्वारा पूजित तथा प्रशंसित भगवान शर्व (शिव) ने अपनी प्रिया पार्वती द्वारा प्रेरित होकर उनसे इस प्रकार कहा।
 
Suta Goswami said: Lord Sharva (Siva), worshipped and praised by the eloquent utterances of the sage Mārkaṇḍeya, being encouraged by His beloved, spoke to him as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)