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bhagavat 12.10.3: सूता गोस्वामी ने कहा: भगवान रुद्र अपनी पत्नी रुद्राणी और अपने नजदीकी साथियों के साथ अपने बैल पर आकाश में यात्रा करते हुए समाधि में लीन मार्कण्डेय को देख रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 12.10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.10.3 
सूत उवाच
तमेवं निभृतात्मानं वृषेण दिवि पर्यटन् ।
रुद्राण्या भगवान् रुद्रो ददर्श स्वगणैर्वृत: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
सूता गोस्वामी ने कहा: भगवान रुद्र अपनी पत्नी रुद्राणी और अपने नजदीकी साथियों के साथ अपने बैल पर आकाश में यात्रा करते हुए समाधि में लीन मार्कण्डेय को देख रहे थे।
 
Suta Goswami said: Lord Rudra, riding on His bull, along with His beloved Rudrani and His personal companions, saw Mārkaṇḍeya in meditation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)