Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.10.18: सूत गोस्वामी ने कहा: देवताओं में शीर्ष नेता और साधुओं के रक्षक भगवान शिव मार्कण्डेय की स्तुति से संतुष्ट हो गए। प्रसन्न होकर, वे मुस्कुराए और ऋषि को संबोधित किया। | bhagavat अध्याय 12.10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूत उवाच
एवं स्तुत: स भगवानादिदेव: सतां गति: ।
परितुष्ट: प्रसन्नात्मा प्रहसंस्तमभाषत ॥ १८ ॥
अनुवाद
सूत गोस्वामी ने कहा: देवताओं में शीर्ष नेता और साधुओं के रक्षक भगवान शिव मार्कण्डेय की स्तुति से संतुष्ट हो गए। प्रसन्न होकर, वे मुस्कुराए और ऋषि को संबोधित किया।
Suta Goswami said: Lord Shiva, the foremost among the gods and the refuge of the saintly devotees, was pleased by the praise of Markandeya. Being pleased, he started laughing and spoke to the sage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥