Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.10.15: मार्कण्डेय जो कि एक ऋषि थे, उन्होंने भगवान शिव की पूजा की। उन्होंने शिव की पत्नी उमा और उनके गणों की भी पूजा की। उन्होंने भगवान शिव और उमा का स्वागत किया, उन्हें बैठने के लिए आसन दिए, उनके पैर धोने के लिए जल दिया, सुगंधित पीने का पानी दिया, सुगंधित तेल दिया, फूल-मालाएँ दीं और आरती के दीपक जलाए। | bhagavat अध्याय 12.10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मै सपर्यां व्यदधात् सगणाय सहोमया ।
स्वागतासनपाद्यार्घ्यगन्धस्रग्धूपदीपकै: ॥ १५ ॥
अनुवाद
मार्कण्डेय जो कि एक ऋषि थे, उन्होंने भगवान शिव की पूजा की। उन्होंने शिव की पत्नी उमा और उनके गणों की भी पूजा की। उन्होंने भगवान शिव और उमा का स्वागत किया, उन्हें बैठने के लिए आसन दिए, उनके पैर धोने के लिए जल दिया, सुगंधित पीने का पानी दिया, सुगंधित तेल दिया, फूल-मालाएँ दीं और आरती के दीपक जलाए।
Mārkaṇḍeya, along with Umā and Sīva's followers, worshipped Lord Sīva with words of welcome, a seat, water for washing his feet, scented drinking water, fragrant oils, garlands of flowers and an aarti lamp.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥