Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.10.10: स्थिति से भली-भांति परिचित होने पर शक्तिमान भगवान् शिव ने मार्कण्डेय के हृदय-आकाश में प्रवेश करने के लिए अपनी योगशक्ति का प्रयोग किया, ठीक वैसे ही जैसे हवा किसी छेद से होकर गुज़रती है। | bhagavat अध्याय 12.10: शिव तथा उमा द्वारा मार्कण्डेय ऋषि का गुणगान । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवांस्तदभिज्ञाय गिरिशो योगमायया ।
आविशत्तद्गुहाकाशं वायुश्छिद्रमिवेश्वर: ॥ १० ॥
अनुवाद
स्थिति से भली-भांति परिचित होने पर शक्तिमान भगवान् शिव ने मार्कण्डेय के हृदय-आकाश में प्रवेश करने के लिए अपनी योगशक्ति का प्रयोग किया, ठीक वैसे ही जैसे हवा किसी छेद से होकर गुज़रती है।
Being fully aware of the situation, the all-powerful Lord Shiva used His yogic powers to enter the heart-sky of Markandeya just as air enters through a hole.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥