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bhagavat 12.1.32-33: किलकिलाओं के बाद उनके तेरह बेटे बाह्लिक होंगे। फिर राजा पुष्पमित्र और उसके बाद उनका बेटा दुर्मित्र शासन करेगा। साथ ही सात अन्ध्र, सात कौशल और विदूर और निषध प्रांतों के राजा भी एक साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शासन करेंगे।   |   bhagavat अध्याय 12.1: कलियुग के पतित वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  12.1.32-33 
तेषां त्रयोदश सुता भवितारश्च बाह्लिका: ।
पुष्पमित्रोऽथ राजन्यो दुर्मित्रोऽस्य तथैव च ॥ ३२ ॥
एककाला इमे भूपा: सप्तान्ध्रा: सप्त कौशला: ।
विदूरपतयो भाव्या निषधास्तत एव हि ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
किलकिलाओं के बाद उनके तेरह बेटे बाह्लिक होंगे। फिर राजा पुष्पमित्र और उसके बाद उनका बेटा दुर्मित्र शासन करेगा। साथ ही सात अन्ध्र, सात कौशल और विदूर और निषध प्रांतों के राजा भी एक साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शासन करेंगे।
 
Kilkilas will be followed by his thirteen sons, Bahlikas, and after them King Pushpamitra, his son Durmitra, the seven Andhras, seven Kosala and the kings of Vidur and Nishadha provinces will also rule in different parts of the world at the same time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)