श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 15-17
 
 
श्लोक  12.1.15-17 
अग्निमित्रस्ततस्तस्मात् सुज्येष्ठो भविता तत: ।
वसुमित्रो भद्रकश्च पुलिन्दो भविता सुत: ॥ १५ ॥
ततो घोष: सुतस्तस्माद् वज्रमित्रो भविष्यति ।
ततो भागवतस्तस्माद् देवभूति: कुरूद्वह ॥ १६ ॥
शुङ्गा दशैते भोक्ष्यन्ति भूमिं वर्षशताधिकम् ।
तत: काण्वानियं भूमिर्यास्यत्यल्पगुणान्नृप ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित, अग्निमित्र राजा बनेगा, उसके बाद सुज्येष्ठ राजा बनेगा। सुज्येष्ठ के बाद, वसुमित्र, भद्रक और भद्रक का पुत्र पुलिन्द राजा बनेगा। पुलिन्द के बाद, उनका पुत्र घोष राजा बनेगा। घोष के बाद, वज्रमित्र, भागवत और देवभूति राजा बनेंगे। इस तरह, हे कुरुश्रेष्ठ, दस शुंग राजा पृथ्वी पर एक सौ वर्षों से अधिक समय तक राज करेंगे। उसके बाद, पृथ्वी काण्व वंश के राजाओं के अधीन हो जाएगी, जिनमें बहुत कम अच्छे गुण होंगे।
 
O King Parikshit, after this Agnimitra will become king, then Sujyestha. After Sujyestha will come Vasumitra, Bhadraka and Bhadraka's son Pulinda. Then Pulinda's son Ghosh will rule, followed by Vajramitra, Bhagavata and Devabhuti. In this way, O best of the Kurus, ten Shunga kings will rule the earth for more than a hundred years. Then this earth will be under the rule of kings of the Kanva dynasty who will have very few qualities.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार, शुंग वंश की शुरुआत तब हुई जब सेनापति पुष्पमित्र ने अपने राजा वृहद्रथ की हत्या करके सत्ता संभाली। पुष्पमित्र के बाद अग्निमित्र और बाकि शुंग वंश का शासन आया, जो 112 सालों तक चला।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)