Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.9.7: उस लड़की को डर था कि ये भलेमानुस उसके परिवार को ग़रीब समझेंगे, क्योंकि उनकी बेटी चावल कूटने के मामूली काम में लगी हुई है। अत्यंत चतुर होने के कारण शर्मीली लड़की ने अपनी दोनों भुजाओं में पहनी शंख की चूड़ियों में से हर एक कलाई में केवल दो चूड़ियाँ छोड़कर बाकी सारी चूड़ियाँ तोड़ डालीं। | bhagavat अध्याय 11.9: पूर्ण वैराग्य । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस लड़की को डर था कि ये भलेमानुस उसके परिवार को ग़रीब समझेंगे, क्योंकि उनकी बेटी चावल कूटने के मामूली काम में लगी हुई है। अत्यंत चतुर होने के कारण शर्मीली लड़की ने अपनी दोनों भुजाओं में पहनी शंख की चूड़ियों में से हर एक कलाई में केवल दो चूड़ियाँ छोड़कर बाकी सारी चूड़ियाँ तोड़ डालीं।
The girl was afraid that these people would think her family was poor because their daughter was engaged in the lowly work of threshing paddy. Being very clever, the shy girl broke all the bangles made of conch shells on her arms, leaving only two on each wrist.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥