Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.9.3: पारिवारिक जीवन में माता-पिता हमेशा अपने घर, बच्चों और प्रतिष्ठा की चिंता में रहते हैं। लेकिन मुझे इन चीज़ों से कोई मतलब नहीं है। मैं किसी परिवार के लिए चिंता नहीं करता या मान-अपमान की परवाह नहीं करता। मैं केवल आत्म-जीवन का आनंद लेता हूं और आध्यात्मिक स्तर पर प्रेम पाता हूं। इस तरह मैं एक बच्चे की तरह दुनिया में घूमता रहता हूं। | bhagavat अध्याय 11.9: पूर्ण वैराग्य । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे मानापमानौ स्तो न चिन्ता गेहपुत्रिणाम् ।
आत्मक्रीड आत्मरतिर्विचरामीह बालवत् ॥ ३ ॥
अनुवाद
पारिवारिक जीवन में माता-पिता हमेशा अपने घर, बच्चों और प्रतिष्ठा की चिंता में रहते हैं। लेकिन मुझे इन चीज़ों से कोई मतलब नहीं है। मैं किसी परिवार के लिए चिंता नहीं करता या मान-अपमान की परवाह नहीं करता। मैं केवल आत्म-जीवन का आनंद लेता हूं और आध्यात्मिक स्तर पर प्रेम पाता हूं। इस तरह मैं एक बच्चे की तरह दुनिया में घूमता रहता हूं।
In family life, parents are always worried about their home, their children and their reputation. But I have nothing to do with these things. I neither worry about any family nor do I care about honor or disgrace. I enjoy the soul life and I get love in the spiritual position. In this way I keep roaming on the earth like a child.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥