श्रीब्राह्मण उवाच
परिग्रहो हि दु:खाय यद् यत्प्रियतमं नृणाम् ।
अनन्तं सुखमाप्नोति तद् विद्वान् यस्त्वकिञ्चन: ॥ १ ॥
अनुवाद
साधु-ब्राह्मण ने कहा : भौतिक संसार में हर व्यक्ति कुछ विशेष चीजों को बहुत अधिक प्रिय मानता है, और ऐसी वस्तुओं के लिए लगाव के कारण अंत में वह दयनीय हो जाता है। जो व्यक्ति इसे समझ जाता है, वह भौतिक संपत्ति और लगाव को त्याग देता है और इस तरह असीमित खुशी और आनंद प्राप्त करता है।
The Sadhu-Brahmin said: In the material world every person holds certain things very dear and due to attachment to such things he ultimately becomes miserable. A person who understands this gives up the ownership and attachment to material possessions and thus attains infinite bliss.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥