चूंकि पिंलगा अब मोक्ष प्रदान करने के लिए भगवान की दया का गुणगान कर रही है, इसलिए निम्नलिखित प्रश्न उठ सकता है: क्या वह प्रेम से भगवान की पूजा कर रही है, या वह केवल एक मुक्तिवादी है जो भौतिक अस्तित्व से मुक्ति की इच्छा रखती है? उत्तर में यह कहा जा सकता है कि कृष्ण-भावनामात्र स्थिति में वह पहले से ही मुक्त है, भले ही इस दुनिया में रह रही हो। अब उसका कार्य केवल भगवान की व्यक्तित्व स्वरूप के प्रति बिना किसी व्यक्तिगत इच्छा के, जिसमें मुक्ति की इच्छा भी शामिल है, प्रेमपूर्ण सेवा करना होगा।
