Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.8.40: अब मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ और मुझे भगवान् की दया पर पूर्ण विश्वास है। इसलिए जो कुछ भी अपने आप आता है, उसी से मैं अपना भरण-पोषण करूंगी। मैं केवल भगवान् के साथ ही जीवन का आनंद लूंगी, क्योंकि वही प्रेम और सुख के वास्तविक स्रोत हैं। | bhagavat अध्याय 11.8: पिंगला की कथा । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सन्तुष्टा श्रद्दधत्येतद्यथालाभेन जीवती ।
विहराम्यमुनैवाहमात्मना रमणेन वै ॥ ४० ॥
अनुवाद
अब मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ और मुझे भगवान् की दया पर पूर्ण विश्वास है। इसलिए जो कुछ भी अपने आप आता है, उसी से मैं अपना भरण-पोषण करूंगी। मैं केवल भगवान् के साथ ही जीवन का आनंद लूंगी, क्योंकि वही प्रेम और सुख के वास्तविक स्रोत हैं।
Now I am completely satisfied and I have complete faith in the mercy of the Lord. Therefore I will maintain myself with whatever comes to me automatically. I will live with the Lord alone, because He is the real source of love and happiness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥