कियत् प्रियं ते व्यभजन् कामा ये कामदा नरा: ।
आद्यन्तवन्तो भार्याया देवा वा कालविद्रुता: ॥ ३६ ॥
अनुवाद
पुरुष स्त्रियों को इंद्रियों के सुख प्रदान करते हैं, किंतु ये सारे पुरुष, और यहाँ तक कि स्वर्ग के देवता भी, सबकी एक शुरुआत और अंत है। वे सब क्षणिक सृष्टियाँ हैं, जिन्हें समय अपने साथ बहा ले जाएगा। इसलिए इनमें से कोई भी अपनी पत्नियों को कितना वास्तविक आनंद या सुख दे सकता है?
Men provide sensual gratification to women, but all these men, as well as the gods in heaven, have a beginning and an end. They are all temporary creations that will be dragged away by time. So how much real joy or happiness can any of them provide to their wives?
तात्पर्य
इस भौतिक जगत में हर कोई मूलतः अपनी स्वयं की इंद्रियों को संतुष्टि पहुँचाता है, और इस प्रकार हर कोई समय के प्रभाव से बरबाद हो रहा है। भौतिकता के मंच पर वास्तव में कोई भी किसी की मदद नहीं करता है। कथित भौतिक प्रेम केवल एक धोखा देने की प्रक्रिया है, जैसा कि अब महिला पिंगला खोज रही है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥