Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.8.34: इस विदेह नगरी में सचमुच मैं ही पक्की मूर्ख हूं। मैंने उस भगवान की अवहेलना की है जो हमें सबकुछ देता है, यहां तक की हमारा मूल आध्यात्मिक स्वरूप भी। मैंने उन्हें छोड़कर कई पुरुषों से इंद्रियों की तृप्ति का भोग करना चाहा। | bhagavat अध्याय 11.8: पिंगला की कथा । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस विदेह नगरी में सचमुच मैं ही पक्की मूर्ख हूं। मैंने उस भगवान की अवहेलना की है जो हमें सबकुछ देता है, यहां तक की हमारा मूल आध्यात्मिक स्वरूप भी। मैंने उन्हें छोड़कर कई पुरुषों से इंद्रियों की तृप्ति का भोग करना चाहा।
Certainly I am the only utter fool in this city of Videha. I have neglected the Supreme Personality of Godhead, who gives us everything, even our original spiritual nature. I have sought sensual gratification from many men, abandoning Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥